नमस्ते दोस्तों! क्या आप भी मेरी तरह कला और रंगीन दुनिया के दीवाने हैं? आजकल जब मैं सड़कों पर निकलता हूँ, तो मुझे दीवारों पर बनी खूबसूरत पेंटिंग्स, यानी भित्ति चित्रों में एक अलग ही जादू दिखाई देता है। ये सिर्फ तस्वीरें नहीं होतीं, बल्कि हमारी कहानियाँ, हमारे शहर की आत्मा और बदलते वक्त का आइना होती हैं।मुझे याद है, कुछ महीने पहले मैं जयपुर के पास एक छोटे से गाँव से गुजर रहा था, जहाँ एक पुरानी दीवार पर बनी हनुमान जी की विशाल पेंटिंग ने सचमुच मेरा दिल छू लिया था। उस दिन मैंने सोचा कि इन गुमनाम कलाकारों के पीछे कितनी मेहनत और जुनून छिपा होता है। यही सोचकर आज मैं आपके लिए एक बेहद खास मेहमान, एक ऐसे अद्भुत भित्ति चित्र कलाकार से हुई अपनी बातचीत का अनुभव लेकर आया हूँ, जिन्होंने अपनी कला से न जाने कितनी सूनी दीवारों में जान फूंक दी है। उनकी हर पेंटिंग एक कहानी कहती है, एक एहसास जगाती है और हमें सोचने पर मजबूर करती है कि कला कैसे हमारे आसपास की दुनिया को बदल सकती है। आजकल तो यह शहरीकरण और संस्कृति का अद्भुत मेल बन गया है, जहाँ कलाकार अपनी रचनात्मकता से समाज को भी एक संदेश देते हैं।इस इंटरव्यू में हमने उनकी कला यात्रा, प्रेरणा के स्रोत और भविष्य में भित्ति कला के बढ़ते चलन पर गहराई से बात की है। मुझे पूरा यकीन है कि यह बातचीत आपको भी कला के एक नए आयाम से परिचित कराएगी और शायद आपको भी अपनी दीवारों पर कुछ रंग भरने की प्रेरणा मिल जाए!
तो फिर देर किस बात की, आइए, इस अनूठी कला यात्रा के बारे में विस्तार से जानते हैं!
वाह, दोस्तों! आपने सही सुना। भित्ति कला सिर्फ दीवारों को सजाना नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी कहानियों को ज़िंदा रखने का एक खूबसूरत तरीका है। मुझे खुशी है कि आप भी मेरी तरह इस कला के जादू को महसूस कर रहे हैं। तो चलिए, उस खास कलाकार से हुई मेरी बातचीत के कुछ और पहलू आपके साथ साझा करता हूँ।
रंगों से भरी कला यात्रा का आरंभ

जब मैंने उस कलाकार से पूछा कि उन्होंने अपनी यह अद्भुत कला यात्रा कैसे शुरू की, तो उनकी आँखों में एक अलग ही चमक आ गई। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक जुनून है, जो बचपन से उनके साथ रहा है। उन्हें याद है, स्कूल के दिनों में जब बाकी बच्चे खेलते थे, वे अपने गाँव की पुरानी हवेलियों की दीवारों पर बने देवी-देवताओं के चित्रों को घंटों निहारते रहते थे। वहीं से उन्हें रंगों से दोस्ती करने का ख्याल आया।
बचपन के सपने और मिट्टी के रंग
उन्होंने बताया कि उनके गाँव में पहले मिट्टी के बर्तनों पर चित्रकला होती थी, लेकिन धीरे-धीरे लोगों ने दीवारों पर भी चित्र बनाना शुरू कर दिया। बचपन में, वे और उनके दोस्त मिलकर कच्ची मिट्टी और गोबर से बनी झोपड़ियों की दीवारों पर पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और देवी-देवताओं की आकृतियां बनाते थे। यह सिर्फ खेल नहीं था, बल्कि कला के प्रति उनके गहरे लगाव की पहली सीढ़ी थी। मुझे सुनकर बड़ा अच्छा लगा कि कैसे साधारण चीज़ों से भी इतनी असाधारण कला का जन्म हो सकता है। उन्हें याद है कि जब पहली बार उन्होंने अपनी बनाई एक छोटी सी पेंटिंग में जान फूंक दी थी, तो उन्हें लगा जैसे उनका सपना पूरा हो गया हो।
कला की विरासत और गुरु का प्रभाव
हमारे कलाकार ने बताया कि उनके लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत उनके दादाजी थे, जो खुद एक छोटे से गाँव में पुरानी मंदिरों की दीवारों पर चित्र बनाते थे। उन्होंने ही उन्हें रंगों को पहचानने, ब्रश पकड़ने और अपनी भावनाओं को दीवार पर उतारने का पहला पाठ पढ़ाया। सच कहूँ, तो उनकी बातों से मुझे अपनी दादी की कहानियाँ याद आ गईं, जिनमें हमेशा कोई न कोई सीख छिपी होती थी। कलाकारों का कहना था कि भारत में भित्ति चित्रों की परंपरा काफी पुरानी है, जो अजंता-एलोरा की गुफाओं से लेकर आज के आधुनिक शहरों तक फैली हुई है।
दीवारों पर उकेरती कहानियाँ: एक कलाकार का नज़रिया
यह सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा कि हमारे कलाकार सिर्फ सुंदर चित्र नहीं बनाते, बल्कि अपनी कला के माध्यम से समाज को एक संदेश भी देते हैं। उन्होंने कहा कि हर दीवार की अपनी एक कहानी होती है, जिसे वे अपने रंगों से बयां करते हैं। मुझे खुद भी ऐसा लगता है कि जब हम किसी सड़क पर चलते हुए अचानक किसी खूबसूरत भित्ति चित्र को देखते हैं, तो वह पल हमें सोचने पर मजबूर कर देता है।
सामाजिक संदेश और कला का प्रभाव
मुझे याद है, कुछ साल पहले मैं दिल्ली के लोधी आर्ट डिस्ट्रिक्ट गया था, जहाँ हर दूसरी दीवार पर किसी न किसी सामाजिक मुद्दे पर पेंटिंग बनी हुई थी। हमारे कलाकार ने बताया कि वे अक्सर ऐसी जगहों पर काम करना पसंद करते हैं, जहाँ उनकी कला लोगों के बीच जागरूकता फैला सके। चाहे वह पर्यावरण संरक्षण हो, नारी सशक्तिकरण हो या फिर शिक्षा का महत्व, उनकी हर पेंटिंग कुछ न कुछ कहती है। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने एक ऐसे गाँव में काम किया, जहाँ पानी की समस्या बहुत गंभीर थी। उन्होंने गाँव की मुख्य दीवार पर पानी बचाओ का संदेश देती एक विशाल पेंटिंग बनाई, जिसे देखकर लोगों में पानी के महत्व को लेकर एक नई समझ पैदा हुई। मुझे लगा, कला में कितनी शक्ति होती है, है ना?
शहरों का बदलता चेहरा और भित्ति कला
आजकल शहरों में स्ट्रीट आर्ट और भित्ति कला का चलन बहुत बढ़ गया है। हमारे कलाकार ने बताया कि पहले यह कला सिर्फ संग्रहालयों तक सीमित थी, लेकिन अब यह गलियों, कैफे और मेट्रो स्टेशनों की दीवारों पर भी देखी जा सकती है। मुझे तो यह देखकर बहुत खुशी होती है कि कैसे यह कला हमारे शहरों को और भी खूबसूरत बना रही है। जैसे जयपुर की पुरानी हवेलियों पर बने पारंपरिक चित्र हों या फिर मुंबई की इमारतों पर बने आधुनिक भित्ति चित्र, हर जगह कला का एक नया रूप देखने को मिलता है।,,
चुनौतियाँ और कला का स्थायी स्वरूप
किसी भी कला को जीवित रखना आसान नहीं होता, और भित्ति कला के साथ भी यही बात है। हमारे कलाकार ने बताया कि उन्हें इस राह में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मुझे तो यह सुनकर थोड़ा दुख हुआ, क्योंकि इतनी खूबसूरत कला को हर कीमत पर बचाया जाना चाहिए।
मौसम की मार और रंगों का चुनाव
उन्होंने बताया कि खुले में दीवारों पर काम करना सबसे मुश्किल होता है, क्योंकि मौसम की मार से पेंटिंग खराब होने का डर रहता है। धूप, बारिश और प्रदूषण से रंगों का फीका पड़ना एक आम बात है। मुझे याद आया, एक बार मैंने अपनी बालकनी में एक छोटी सी पेंटिंग बनाई थी, और कुछ ही महीनों में उसके रंग उड़ गए थे। उन्होंने बताया कि इसके लिए वे खास तरह के रंगों और तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, जो लंबे समय तक टिके रहें। प्राचीन भारतीय दीवार चित्रों को बनाने की तकनीक पर 5वीं/6वीं शताब्दी के एक संस्कृत ग्रंथ ‘विष्णुधर्मोत्तरम्’ में भी चर्चा की गई है, जिससे पता चलता है कि पहले भी कलाकार स्थायित्व पर ध्यान देते थे।,
सामुदायिक सहयोग और संरक्षण की आवश्यकता
एक और बड़ी चुनौती है लोगों का सहयोग प्राप्त करना और इन कलाकृतियों का संरक्षण करना। उन्होंने बताया कि कई बार लोग इन चित्रों को गंदा कर देते हैं या उन पर विज्ञापन चिपका देते हैं। मुझे लगता है कि यह हमारी सबकी जिम्मेदारी है कि हम अपनी कला और संस्कृति को बचाएं। उन्होंने कहा कि सरकार और कला प्रेमियों को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए, ताकि यह अद्भुत कला भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंच सके।
| भित्ति कला के फायदे | भित्ति कला की चुनौतियाँ |
|---|---|
| शहरों को सुंदर और आकर्षक बनाना | मौसम की मार से रंगों का फीका पड़ना |
| सामाजिक संदेश देना और जागरूकता फैलाना | रखरखाव और संरक्षण की कमी |
| कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच देना | सार्वजनिक स्थानों पर बर्बरता |
| पर्यटन को बढ़ावा देना | उचित फंडिंग और संसाधनों का अभाव |
भित्ति कला का भविष्य: उम्मीदें और नवाचार
बातचीत के अंत में, मैंने उनसे पूछा कि वे भित्ति कला के भविष्य को कैसे देखते हैं। उनकी प्रतिक्रिया में एक नई उम्मीद और जोश था, जिसने मेरे दिल को छू लिया। मुझे भी लगता है कि यह कला हमेशा जीवित रहेगी, बस हमें इसे थोड़ा सहारा देने की ज़रूरत है।
युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा
उन्होंने बताया कि आजकल कई युवा कलाकार इस क्षेत्र में आ रहे हैं और अपनी रचनात्मकता से इसे एक नया आयाम दे रहे हैं। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छी बात है, क्योंकि युवा ही किसी भी कला को आगे ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे खुद भी नए कलाकारों को प्रशिक्षित करते हैं और उन्हें अपनी कला को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्हें याद है कि कैसे लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एंड कॉलेजेज ने हाल ही में अजंता भित्तिचित्र पेंटिंग कार्यशाला का आयोजन किया था, जहाँ छात्रों को इस परंपरा से जुड़ने का मौका मिला। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर युवा कलाकार इस कला को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।
तकनीक का संगम और नए आयाम
आजकल तो तकनीक ने हर क्षेत्र में कमाल कर दिखाया है, और भित्ति कला भी इससे अछूती नहीं है। कलाकार ने बताया कि अब वे डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल करके अपनी पेंटिंग के डिज़ाइन बनाते हैं, जिससे काम और भी आसान हो जाता है। मुझे तो यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि कैसे पारंपरिक कला आधुनिक तकनीक के साथ मिलकर इतना खूबसूरत रूप ले सकती है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भित्ति कला और भी विकसित होगी, और हमें नए-नए प्रयोग देखने को मिलेंगे। मुझे यकीन है कि यह कला हमारे आसपास की दुनिया को और भी रंगीन और प्रेरणादायक बनाएगी।
अपनी दीवारों को कला का रूप कैसे दें: कुछ खास टिप्स

तो दोस्तों, अगर आप भी मेरी तरह अपनी दीवारों को सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि अपनी भावनाओं और कला का एक कैनवास बनाना चाहते हैं, तो हमारे कलाकार ने कुछ शानदार टिप्स दिए हैं, जो मुझे खुद भी बहुत पसंद आए। मुझे लगता है कि ये टिप्स आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित होंगे।
सही विषय का चुनाव: आपकी कहानी, आपकी दीवार
सबसे पहले तो, आपको यह सोचना होगा कि आप अपनी दीवार पर क्या कहानी कहना चाहते हैं। क्या आप प्रकृति के प्रेमी हैं? तो पहाड़ों, झरनों या फूलों की पेंटिंग लगा सकते हैं। या फिर आप आध्यात्मिक शांति चाहते हैं, तो बुद्ध या गणेश जी की तस्वीर लगा सकते हैं। मुझे याद है, मेरे एक दोस्त ने अपने लिविंग रूम में दौड़ते हुए घोड़ों की पेंटिंग लगाई थी, जो उसे हमेशा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती थी। उन्होंने बताया कि पेंटिंग सिर्फ सजावट नहीं होती, बल्कि यह आपकी ऊर्जा और भावनाओं को भी प्रभावित करती है।
रंगों का जादू और वास्तु का ज्ञान
रंगों का चुनाव करते समय भी थोड़ा ध्यान रखना चाहिए। हमारे कलाकार ने बताया कि हल्के और मनभावन रंग हमें मानसिक शांति देते हैं, जबकि गहरे रंग ऊर्जा और उत्साह भरते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ खास दिशाओं में खास तरह की पेंटिंग लगाने से सकारात्मक ऊर्जा आती है। जैसे, उगते हुए सूर्य की पेंटिंग पूर्व दिशा में लगाने से नई शुरुआत और आशा का संचार होता है। मुझे तो यह सब सुनकर बहुत हैरानी हुई कि कैसे रंगों और दिशाओं का हमारे जीवन पर इतना गहरा असर पड़ता है। मुझे लगता है कि आप भी इन टिप्स को अपनी दीवारों पर आजमा सकते हैं।
भित्ति कला में उभरते ट्रेंड्स और नए प्रयोग
आजकल कला की दुनिया में हर दिन कुछ नया हो रहा है, और भित्ति कला भी इससे पीछे नहीं है। हमारे कलाकार ने बताया कि अब भित्ति कला सिर्फ पारंपरिक विषयों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसमें कई नए ट्रेंड्स और प्रयोग देखने को मिल रहे हैं। मुझे तो यह सुनकर बहुत उत्सुकता हुई, क्योंकि मैं हमेशा नई-नई चीज़ों को आज़माना पसंद करता हूँ।
त्रि-आयामी (3D) भित्ति चित्र और ऑप्टिकल इल्यूजन
उन्होंने बताया कि आजकल 3D भित्ति चित्रों का चलन बहुत बढ़ गया है, जो देखने में बिल्कुल असली लगते हैं और हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। मुझे याद है, एक बार मैंने गोवा में एक ऐसी 3D पेंटिंग देखी थी, जिसमें एक बड़ी सी शार्क दीवार से बाहर निकलती दिख रही थी। उसे देखकर मुझे सच में लगा कि मैं समुद्र के बीच में खड़ा हूँ। उन्होंने बताया कि ये पेंटिंग ऑप्टिकल इल्यूजन का इस्तेमाल करके बनाई जाती हैं, जिससे दर्शक को एक अनूठा अनुभव मिलता है। यह वाकई कमाल की बात है कि कैसे कलाकार हमारी आंखों को धोखा देकर एक जादुई दुनिया रच देते हैं।
मिश्रित माध्यम और इंस्टॉलेशन आर्ट
आज के कलाकार सिर्फ पेंटिंग तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अलग-अलग माध्यमों का प्रयोग करके अपनी कला को और भी रोचक बना रहे हैं। हमारे कलाकार ने बताया कि अब वे पेंटिंग के साथ-साथ मूर्तियों, रोशनी और अन्य चीज़ों का इस्तेमाल करके इंस्टॉलेशन आर्ट बना रहे हैं। मुझे तो यह सुनकर बहुत प्रेरणा मिली कि कैसे कला की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने कहा कि ये नए प्रयोग न केवल दर्शकों को आकर्षित करते हैं, बल्कि कला को एक नया अर्थ भी देते हैं। मुझे लगता है कि यह कला का भविष्य है, जहाँ हर चीज़ संभव है।
कलाकार की प्रेरणा और भविष्य की उड़ान
इस अद्भुत कलाकार से बात करके मुझे लगा कि कला सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है। उनकी बातों में जो जुनून और समर्पण था, उसने मुझे बहुत प्रभावित किया। मुझे पूरा यकीन है कि उनकी यह कहानी आपको भी अपनी पसंदीदा चीज़ों को जुनून के साथ करने की प्रेरणा देगी।
जुनून को पंख देना
उन्होंने मुझसे कहा, “कलाकार बनने के लिए सिर्फ हुनर ही नहीं, बल्कि जुनून भी ज़रूरी होता है।” मुझे यह बात बहुत सही लगी, क्योंकि किसी भी काम में सफल होने के लिए दिल से उसे चाहना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने बताया कि भले ही इस रास्ते में कई मुश्किलें आती हैं, लेकिन जब आप अपनी बनाई हुई कलाकृति को पूरा करते हैं, तो जो खुशी मिलती है, वह किसी और चीज़ में नहीं मिल सकती। मुझे याद है, जब मैंने पहली बार अपना ब्लॉग शुरू किया था, तो मुझे भी बहुत डर लग रहा था, लेकिन अपने जुनून की वजह से ही मैं आज यहाँ हूँ।
नई पीढ़ियों के लिए एक विरासत
कलाकार ने बताया कि उनका सपना है कि भित्ति कला की यह विरासत नई पीढ़ियों तक पहुंचे। वे चाहते हैं कि ज़्यादा से ज़्यादा युवा इस कला से जुड़ें और इसे आगे बढ़ाएं। मुझे लगता है कि यह बहुत नेक विचार है, क्योंकि अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि वे भविष्य में और भी बड़ी परियोजनाओं पर काम करना चाहते हैं, जिससे यह कला और भी लोगों तक पहुंच सके। मुझे पूरा यकीन है कि उनके जैसे कलाकार की बदौलत हमारी दीवारें हमेशा बोलती रहेंगी और हमें नई-नई कहानियाँ सुनाती रहेंगी।
글을 마치며
तो मेरे प्यारे दोस्तों, भित्ति कला की यह यात्रा वाकई में रंगों, कहानियों और प्रेरणा से भरी रही। उस कलाकार से बात करके मुझे महसूस हुआ कि कला सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि एक आवाज़ है, जो दीवारों पर ज़िंदा रहती है और हमसे बातें करती है। मुझे उम्मीद है कि मेरी तरह आपको भी इस अद्भुत कला के पीछे की मेहनत, जुनून और सुंदरता का एहसास हुआ होगा। आइए, हम सब मिलकर इस अनमोल विरासत को सहेजने और उसे आगे बढ़ाने का संकल्प लें, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इन बोलती दीवारों से प्रेरणा ले सकें।
जानने योग्य उपयोगी जानकारी
1. अपनी दीवार पर पेंटिंग बनाने से पहले, सुनिश्चित करें कि दीवार साफ और चिकनी हो, ताकि रंग अच्छी तरह से चढ़ें और लंबे समय तक टिकें।
2. रंगों का चुनाव करते समय कमरे के आकार और रोशनी का ध्यान रखें; छोटे कमरों में हल्के रंग और पर्याप्त रोशनी वाले बड़े कमरों में गहरे रंग अच्छे लगते हैं।
3. अगर आप खुद पेंटिंग कर रहे हैं, तो पहले एक छोटे से हिस्से पर ट्रायल करके देखें और फिर पूरी दीवार पर काम करें; इससे गलतियों से बचा जा सकता है।
4. भित्ति चित्रों के रखरखाव के लिए, उन्हें सीधे धूप और पानी से बचाएं, और समय-समय पर मुलायम कपड़े से धीरे से साफ करें।
5. यदि आप पेशेवर कलाकार से पेंटिंग करवा रहे हैं, तो उनके पिछले काम देखें, सामग्री की गुणवत्ता के बारे में पूछें और एक स्पष्ट अनुबंध करें।
महत्वपूर्ण बातों का सारांश
यह बातचीत हमें सिखाती है कि भित्ति कला सिर्फ दीवारों को सजाना नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, सामाजिक संदेशों और व्यक्तिगत कहानियों को जीवंत रखने का एक सशक्त माध्यम है। एक कलाकार के लिए यह बचपन का जुनून, गुरु की शिक्षा और अथक प्रयास का परिणाम होता है, जो सामाजिक जागरूकता फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, मौसम की मार और संरक्षण की कमी जैसी चुनौतियाँ मौजूद हैं, फिर भी युवा कलाकारों का उत्साह और तकनीक का समावेश इस कला को एक उज्ज्वल भविष्य दे रहा है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस अनूठी विरासत को सम्मान दें और उसे सहेजें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) 📖
प्र: भित्ति चित्र कला क्या है और इसकी खासियत क्या है?
उ: इसका जवाब देते हुए मुझे उस दीवार की याद आ जाती है जो मैंने जयपुर के पास देखी थी! भित्ति चित्र कला, जिसे अंग्रेजी में ‘म्यूरल आर्ट’ भी कहते हैं, असल में दीवारों पर बनाई गई बड़ी-बड़ी पेंटिंग्स होती हैं.
ये सिर्फ रंग और ब्रश का खेल नहीं है, दोस्तों, बल्कि ये एक कहानी कहने का ज़रिया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कला संग्रहालयों या गैलरियों की चारदीवारी से निकलकर सीधे हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन जाती है.
जब आप सड़क पर चलते हुए किसी खूबसूरत भित्ति चित्र को देखते हैं, तो वह आपको रुकने पर मजबूर कर देता है, सोचने पर मजबूर कर देता है. एक और खास बात यह है कि भित्ति चित्र अक्सर किसी खास थीम या संदेश पर आधारित होते हैं.
हमारे कलाकार दोस्त ने बताया था कि कई बार वे सामाजिक मुद्दों, स्थानीय संस्कृति, इतिहास या फिर प्रकृति की खूबसूरती को अपनी कला के ज़रिए दिखाते हैं. इससे सिर्फ दीवारें ही खूबसूरत नहीं बनतीं, बल्कि लोग भी जागरूक होते हैं और उस कला से भावनात्मक रूप से जुड़ पाते हैं.
यह कला शहर की पहचान बन जाती है, और मेरी तो यही राय है कि हर शहर में ऐसी कला को बढ़ावा मिलना चाहिए क्योंकि ये हमारी विरासत को भी ज़िंदा रखती है और आधुनिकता का भी एहसास दिलाती है.
प्र: एक आम इंसान इस कला को कैसे बढ़ावा दे सकता है या इससे जुड़ सकता है?
उ: यह एक बहुत ही ज़रूरी सवाल है! अक्सर लोग सोचते हैं कि कला सिर्फ कलाकारों के लिए होती है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. मेरे हिसाब से, हम सभी इस कला को कई तरीकों से सपोर्ट कर सकते हैं.
सबसे पहले, आप अपने आस-पड़ोस की खूबसूरत भित्ति चित्रों की सराहना करें. उन्हें देखें, उनके बारे में जानें और दूसरों को भी बताएं. आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ मिलकर ऐसी जगहों पर जा सकते हैं जहाँ ये कलाकृतियाँ मौजूद हैं.
इससे कलाकारों को प्रोत्साहन मिलता है. दूसरा तरीका है सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना. अगर आपको कोई भित्ति चित्र पसंद आता है, तो उसकी तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर शेयर करें और कलाकार को टैग करें (अगर आपको उनका नाम पता हो).
यह उन्हें पहचान दिलाने में मदद करेगा. तीसरा, अगर आपके पास मौका हो, तो स्थानीय कला उत्सवों या कार्यशालाओं में भाग लें जहाँ भित्ति चित्र कला सिखाई जाती हो.
आप चाहें तो अपने घर की किसी खाली दीवार पर खुद एक छोटा सा भित्ति चित्र बनाने की कोशिश कर सकते हैं, या फिर किसी स्थानीय कलाकार से संपर्क करके अपनी दीवार पर कुछ बनवाने के बारे में सोच सकते हैं.
मैंने खुद एक बार एक छोटे से कैफे में एक कलाकार को अपनी कला दिखाते देखा था, और यह देख कर मेरा मन भी हुआ कि क्यों न मैं भी अपनी बालकनी की दीवार को रंगों से सजाऊँ!
इससे न सिर्फ कलाकारों को काम मिलता है, बल्कि आपके आसपास का माहौल भी खुशनुमा हो जाता है.
प्र: एक भित्ति चित्र कलाकार बनने के लिए किन चीज़ों की ज़रूरत होती है और इसमें भविष्य कैसा है?
उ: मेरे कलाकार दोस्त के साथ हुई बातचीत में यह सवाल सबसे दिलचस्प था! उन्होंने बताया कि भित्ति चित्र कलाकार बनने के लिए सबसे पहले तो जुनून और मेहनत बहुत ज़रूरी है.
सिर्फ डिग्री से काम नहीं चलता, बल्कि रचनात्मकता और कुछ नया करने की भूख होनी चाहिए. आपको रंगों, आकृतियों और रचना की अच्छी समझ होनी चाहिए. धैर्य भी एक बड़ा गुण है क्योंकि कई बार एक बड़ा भित्ति चित्र बनाने में हफ्तों या महीनों लग जाते हैं.
शिक्षा की बात करें तो, ललित कला (Fine Arts) में डिग्री या डिप्लोमा काफी मददगार साबित हो सकता है, लेकिन सबसे ज़रूरी है अनुभव और लगातार अभ्यास. छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स से शुरुआत करें, सामुदायिक कार्यक्रमों में अपनी कला का प्रदर्शन करें.
आजकल तो सोशल मीडिया एक बहुत बड़ा मंच है जहाँ आप अपना पोर्टफोलियो बना सकते हैं और लोगों तक पहुँच सकते हैं. मैंने देखा है कि कई कलाकार इंस्टाग्राम और यूट्यूब के ज़रिए अपनी पहचान बना रहे हैं.
भविष्य की बात करें तो, भित्ति चित्र कला का भविष्य बहुत उज्ज्वल है. शहरीकरण बढ़ रहा है, लोग अपने शहरों को और खूबसूरत बनाना चाहते हैं. कॉर्पोरेट ऑफिस, कैफे, रेस्टोरेंट, और यहाँ तक कि बड़े आवासीय प्रोजेक्ट्स में भी अब कलाकार अपनी भित्ति चित्रों के लिए बुलाए जाते हैं.
सरकारें भी अब ‘स्मार्ट सिटी’ प्रोजेक्ट्स के तहत इस कला को बढ़ावा दे रही हैं. हमारे कलाकार दोस्त ने बताया कि पहले जहां सिर्फ शौकिया तौर पर काम मिलता था, वहीं अब इसमें अच्छा करियर बनाने के कई मौके हैं.
बस आपको अपनी कला को निखारना होगा और दुनिया को दिखाना होगा कि आपके अंदर क्या जादू है! मुझे तो पूरा यकीन है कि आने वाले समय में हमें और भी ज़्यादा दीवारों पर रंगीन कहानियाँ देखने को मिलेंगी.






